CBSE new exam pattern rule 2026-27 के तहत CBSE ने 10वीं, 12वीं की परीक्षा पैटर्न में किए हैं बड़े बदलाव। 50% कॉपिटेंसी प्रश्न, साल में दो बार परीक्षा का विकल्प – जानें NEP 2020 पर आधारित नए नियम और मार्किंग स्कीम की पूरी जानकारी।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने CBSE new exam pattern rule 2026-27 के तहत 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में क्रांतिकारी बदलावों की घोषणा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप, इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर क्षमता-आधारित शिक्षा (Competency-Based Learning) पर ज़ोर देना है, जिससे छात्रों का समग्र विकास हो सके। यह नया CBSE new exam pattern rule छात्रों को तनाव-मुक्त वातावरण में अपनी योग्यता साबित करने का बेहतर अवसर देगा।
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CBSE new exam pattern 2025-26 kya hai
बोर्ड परीक्षाएँ हर साल लाखों छात्रों की पढ़ाई और करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। परीक्षाओं को अधिक प्रभावी और छात्र–हितैषी बनाने के लिए हर वर्ष इनके पैटर्न और प्रक्रिया में कुछ न कुछ बदलाव किए जाते हैं। इसी तरह, 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए भी सरकार और शिक्षा बोर्ड ने चार अहम बदलाव लागू किए हैं। इनका उद्देश्य छात्रों की समझ को गहरा करना, उनकी सोचने की क्षमता को विकसित करना और परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी व उपयोगी बनाना है।
ये बदलाव छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम कर उनकी वास्तविक क्षमता को सामने लाने में मदद करेंगे। नए पैटर्न के तहत प्रश्न किताबों से जुड़े पैराग्राफ आधारित होंगे, जिससे तैयारी आसान होगी और पूरा ध्यान कॉन्सेप्ट समझने पर रहेगा। अब छात्रों को केवल याद करने पर निर्भर नहीं रहना होगा, बल्कि विषय को समझकर उसे लागू करना अधिक ज़रूरी होगा।
CBSE new exam pattern मे मुख्य बदलाव: क्या है?
CBSE new exam pattern rule के तहत किए गए सबसे महत्वपूर्ण बदलाव नीचे दिए गए हैं:
1. योग्यता-आधारित प्रश्नों का बढ़ा दायरा
- यह CBSE new exam pattern rule का सबसे बड़ा हिस्सा है। अब प्रश्न पत्रों में योग्यता-आधारित (Competency-Based) प्रश्नों का हिस्सा 50% तक बढ़ा दिया गया है।
- 50% प्रश्न: कॉपिटेंसी-आधारित (Case-Based, Source-Based, Integrated Questions, MCQs)।
- 20% प्रश्न: वस्तुनिष्ठ प्रकार (MCQs)।
- 30% प्रश्न: रचनात्मक उत्तर वाले प्रश्न (लघु/दीर्घ उत्तरीय)।
- फायदा: यह बदलाव छात्रों के वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने, आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) और अवधारणाओं को लागू करने की क्षमता का परीक्षण करेगा।
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2. साल में दो बार बोर्ड परीक्षा का विकल्प (केवल कक्षा 10 के लिए)
CBSE new exam pattern rule के तहत, कक्षा 10 के छात्रों को एक शैक्षणिक वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा।
- पहला मौका: मुख्य परीक्षा फरवरी/मार्च में।
- दूसरा मौका: सुधार परीक्षा मई/जून में।
फायदा: छात्रों को अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर बनाए रखने की अनुमति होगी, जिससे परीक्षा का दबाव कम होगा और ‘हाई स्टेक’ पहलू खत्म होगा।
Download CBSE class 10th and Class 12th exam date sheet
3. विषय-वार प्रश्न पत्रों का संरचित विभाजन
नए CBSE new exam pattern rule के अनुसार, विशेष रूप से सामाजिक विज्ञान (Social Science) और विज्ञान (Science) जैसे विषयों के प्रश्न पत्रों को अधिक संरचित (Structured) बनाया गया है।
- सामाजिक विज्ञान (कक्षा 10): प्रश्न पत्र को अब चार स्पष्ट खंडों में विभाजित किया गया है: इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र।
- यह सुनिश्चित करता है कि सभी विषयों को संतुलित कवरेज मिले।
4. आंतरिक मूल्यांकन (Internal Assessment) का महत्व
CBSE new exam pattern rule में आंतरिक मूल्यांकन (20 अंक) को भी मजबूत किया गया है। इसमें पीरियोडिक टेस्ट, परियोजना कार्य (Project Work), और विषय संवर्धन गतिविधियों (Subject Enrichment Activities) पर समान रूप से ज़ोर दिया गया है।
| मूल्यांकन का प्रकार | अंक (20 में से) |
| पेन-पेपर आधारित पीरियोडिक टेस्ट | 05 |
| मल्टीपल असेसमेंट | 05 |
| पोर्टफोलियो | 05 |
| विषय संवर्धन गतिविधियाँ/लैब एक्टिविटी | 05 |
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छात्रों के लिए रणनीति और तैयारी
नया CBSE new exam pattern rule छात्रों से तैयारी की रणनीति में बदलाव की मांग करता है।
- अवधारणात्मक स्पष्टता पर ध्यान दें: अब रटने की बजाय अवधारणाओं को समझने और उनके अनुप्रयोग (Application) पर ध्यान दें।
- कॉपिटेंसी प्रश्नों का अभ्यास करें: सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक सैंपल पेपर और केस-आधारित प्रश्नों का अधिक से अधिक अभ्यास करें।
- समयबद्ध मॉक टेस्ट: परीक्षा के पैटर्न और समय-सीमा को समझने के लिए नियमित रूप से समयबद्ध मॉक टेस्ट दें।
- पाठ्यक्रम (Syllabus) का गहन अध्ययन: सुनिश्चित करें कि आप पूरा पाठ्यक्रम कवर करें, क्योंकि प्रश्न अब समग्र (Holistic) समझ पर आधारित होंगे।
इस CBSE new exam pattern rule का लक्ष्य केवल अंकों का मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि छात्रों को 21वीं सदी के कौशल के लिए तैयार करना है। यह कदम भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

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