उम्र का फासला मिटा देता है सच्चा प्यार: पूजा-सौरभ की प्रेरणादायक Romantic love story

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दिल्ली की एक बीएससी छात्रा पूजा और मशहूर हार्ट सर्जन डॉ. सौरभ के बीच की दिल छू लेने वाली प्रेम कहानी। पहली मुलाकात अस्पताल में हुई और फिर दोस्ती प्यार में बदल गई। उम्र के फासले, परिवार के विरोध के बावजूद उनका प्यार जीत गया। एक प्रेरणादायक Romantic love story।

पूजा-सौरभ की प्रेरणादायक Romantic love story

दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर, जहां जीवन की रफ्तार कभी थमती नहीं, वहां एक छोटी सी दुनिया में पूजा रहती थी। पूजा, उम्र 21 साल, दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी की छात्रा थी। वह जीव विज्ञान में विशेष रुचि रखती थी। उसकी आंखों में सपनों की चमक थी, और दिल में विज्ञान की जिज्ञासा। उसके बाल काले और लंबे थे, चेहरा मासूम और मुस्कान इतनी मीठी कि कोई भी देखकर मुस्कुरा उठे। पूजा का परिवार मध्यम वर्ग का था। वह किसी भी Romantic love story से अभी तक दूर थी। पिता एक सरकारी कर्मचारी, मां गृहिणी, और एक छोटा भाई जो स्कूल में पढ़ता था। पूजा की जिंदगी किताबों, प्रयोगशाला और दोस्तों के बीच गुजर रही थी। लेकिन कभी-कभी वह सोचती कि जीवन में प्यार जैसी कोई चीज भी होती है क्या?

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दूसरी तरफ, सौरभ था। डॉ. सौरभ मेहता, उम्र 32 साल, दिल्ली के सबसे प्रसिद्ध अस्पतालों में से एक में सर्जन। वह हृदय रोग विशेषज्ञ थे और उनकी ख्याति पूरे शहर में फैली हुई थी। सौरभ का चेहरा तेजस्वी था, आंखें गहरी और आवाज इतनी शांत कि मरीजों को सुनकर ही आधा दर्द कम हो जाता। वह एक अमीर परिवार से थे, लेकिन उनकी मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया था। सौरभ की जिंदगी ऑपरेशन थिएटर, मरीजों और सेमिनारों में गुजरती थी। प्यार? उसके लिए समय कहां था? लेकिन कभी-कभी रात के अंधेरे में वह सोचता कि क्या कोई ऐसी लड़की मिलेगी जो उसके व्यस्त जीवन को समझ सके?

एक दिन, पूजा की मां को सीने में दर्द हुआ। घरवाले घबरा गए और उन्हें तुरंत अपोलो अस्पताल ले गए। वहां इमरजेंसी में डॉ. सौरभ ड्यूटी पर थे। पूजा अपनी मां के साथ थी, उसकी आंखें डर से भरी हुईं। सौरभ ने मरीज को देखा, कुछ टेस्ट करवाए और कहा, “चिंता मत कीजिए, यह हल्का अटैक है। दवाइयों से ठीक हो जाएगा।” पूजा ने सौरभ की तरफ देखा। उनकी शांत आवाज ने उसे थोड़ा सुकून दिया। सौरभ ने पूजा से बात की, “आपकी मां ठीक हैं। आप बीएससी की छात्रा हैं? जीव विज्ञान में? अच्छा, तो आप हृदय की संरचना के बारे में जानती होंगी।” पूजा हैरान हो गई। “हां डॉक्टर, लेकिन प्रैक्टिकल में इतना नहीं।” सौरभ मुस्कुराए, “कभी अस्पताल आओ, मैं दिखाता हूं।”

यह पहली मुलाकात थी। पूजा घर लौटी, लेकिन सौरभ की आंखें उसके मन में बस गईं। अगले दिन, मां की जांच के लिए फिर अस्पताल गई। सौरभ मिले, इस बार थोड़ी ज्यादा बात हुई। पूजा ने पूछा, “डॉक्टर बनना कितना मुश्किल होता है?” सौरभ ने हंसकर कहा, “जितना मुश्किल, उतना ही मजेदार। तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?” बातें बढ़ती गईं। पूजा को लगा कि सौरभ सिर्फ डॉक्टर नहीं, एक अच्छे इंसान भी हैं।

दोस्ती की शुरुआत

कुछ दिनों बाद, पूजा की मां ठीक हो गईं। लेकिन पूजा का मन अस्पताल की तरफ खिंचता रहा। उसने फैसला किया कि वह वॉलंटियरिंग करेगी। अस्पताल में एक प्रोग्राम था जहां छात्र मरीजों की मदद करते थे। पूजा ने ज्वाइन किया। वहां सौरभ से अक्सर मुलाकात होती। कभी कॉफी ब्रेक में, कभी वार्ड में। सौरभ पूजा की जिज्ञासा से प्रभावित थे। “तुम्हें हृदय के बारे में जानना है? आओ, लैब में चलो।” सौरभ ने उसे कुछ मॉडल दिखाए, व्याख्या की। पूजा की आंखें चमक उठीं। “वाह डॉक्टर, यह तो अद्भुत है!”

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धीरे-धीरे दोस्ती गहरी होती गई। सौरभ पूजा को फोन करते, “आज क्या पढ़ा?” पूजा बताती, और सौरभ अपने अनुभव शेयर करते। एक शाम, अस्पताल के बाहर बारिश हो रही थी। पूजा बस का इंतजार कर रही थी। सौरभ ने देखा और कहा, “मैं ड्रॉप कर दूं?” पूजा हिचकिचाई, लेकिन मान गई। कार में बातें हुईं। सौरभ ने बताया, “मैं बचपन से डॉक्टर बनना चाहता था। मेरे पिता भी डॉक्टर थे।” पूजा ने कहा, “मैं वैज्ञानिक बनना चाहती हूं। लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां…” सौरभ ने कहा, “सपने पूरे करने पड़ते हैं, पूजा।”

उस रात पूजा सो नहीं सकी। सौरभ का नाम उसके दिल में गूंज रहा था। सौरभ भी सोच रहे थे, “यह लड़की अलग है। इतनी सच्ची।” अगले हफ्ते, सौरभ ने पूजा को एक मेडिकल सेमिनार में आमंत्रित किया। पूजा गई। वहां सौरभ का भाषण सुनकर वह और प्रभावित हुई। सेमिनार के बाद, उन्होंने साथ डिनर किया। पहली बार बाहर। पूजा ने कहा, “आप इतने फेमस हैं, फिर भी इतने साधारण।” सौरभ मुस्कुराए, “फेमस होना अच्छा है, लेकिन अकेलापन बुरा।”

प्यार का इजहार

महीनों बीत गए। दोस्ती अब प्यार में बदल रही थी। पूजा को सौरभ की हर बात अच्छी लगती। सौरभ को पूजा की मासूमियत। एक दिन, पूजा की परीक्षा थी। वह तनाव में थी। सौरभ ने फोन किया, “चिंता मत करो, तुम अच्छा करोगी।” परीक्षा के बाद, पूजा ने सौरभ को मैसेज किया, “पास हो गई!” सौरभ खुश हुए और कहा, “चलो सेलिब्रेट करें।”

वे एक पार्क में मिले। शाम का समय, हल्की ठंडी हवा। सौरभ ने पूजा का हाथ पकड़ा। “पूजा, मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं।” पूजा का दिल धड़कने लगा। “क्या डॉक्टर?” सौरभ ने कहा, “मैं तुमसे प्यार करता हूं। तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी जिज्ञासा, सब कुछ।” पूजा की आंखें नम हो गईं। “मैं भी, सौरभ। लेकिन मैं छात्रा हूं, आप डॉक्टर। क्या यह सही है?” सौरभ ने कहा, “प्यार में उम्र या स्टेटस मायने नहीं रखता।”

उस दिन से उनका प्यार परवान चढ़ा। वे चुपके-चुपके मिलते। फोन पर घंटों बातें। पूजा सौरभ के लिए कविताएं लिखती, सौरभ उसे गिफ्ट देते। लेकिन चुनौतियां भी आईं। पूजा के परिवार को पता चला कि वह किसी डॉक्टर से मिलती है। पिता ने कहा, “वह उम्र में बड़ा है। पढ़ाई पर ध्यान दो।” पूजा रोई, लेकिन सौरभ ने हिम्मत दी। “हम साथ हैं, सब ठीक होगा।”

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चुनौतियां और संघर्ष

एक दिन, सौरभ का एक बड़ा ऑपरेशन था। मरीज गंभीर था। ऑपरेशन सफल हुआ, लेकिन सौरभ थक गए। पूजा अस्पताल आई, सौरभ को देखा। “आप आराम करो।” सौरभ ने कहा, “तुम हो तो सब आसान लगता है।” लेकिन तभी सौरभ के परिवार ने पूजा के बारे में पता चला। सौरभ की मां ने कहा, “वह छात्रा है, हमारी बराबरी नहीं। कोई डॉक्टर लड़की ढूंढो।” सौरभ ने विरोध किया, “मैं पूजा से प्यार करता हूं।”

पूजा की तरफ भी दबाव बढ़ा। दोस्तों ने कहा, “वह फेमस डॉक्टर है, तुम्हें इस्तेमाल करेगा।” पूजा उदास हुई। एक रात, वे मिले। पूजा ने कहा, “शायद हमें अलग हो जाना चाहिए।” सौरभ ने गले लगाया, “नहीं पूजा, हम लड़ेंगे।” वे साथ रहे। पूजा ने अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया। सौरभ ने अपने परिवार को मनाने की कोशिश की।

एक बार, सौरभ को एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए जाना पड़ा। दो हफ्ते के लिए। पूजा अकेली महसूस करती। लेकिन सौरभ रोज वीडियो कॉल करते। “मिस यू पूजा।” लौटकर सौरभ ने पूजा को सरप्राइज दिया – एक रिंग। “यह प्रॉमिस रिंग है। हम शादी करेंगे।”

खुशी का सफर

पूजा ने बीएससी पूरी की। अब वह एमएससी करने वाली थी। सौरभ ने उसके लिए एक छोटा पार्टी रखी। वहां दोनों के परिवार आए। सौरभ ने सबके सामने पूजा से शादी का प्रस्ताव रखा। पूजा के पिता ने कहा, “अगर बेटी खुश है, तो हमें कोई ऐतराज नहीं।” सौरभ की मां भी मान गईं।

शादी हुई। धूमधाम से। पूजा अब डॉक्टर की पत्नी थी, लेकिन अपनी पढ़ाई जारी रखी। सौरभ हमेशा सपोर्ट करते। वे साथ घूमते, प्यार करते। पूजा ने कहा, “तुम्हारी वजह से मेरा जीवन पूरा हुआ।” सौरभ ने जवाब दिया, “तुम्हारी वजह से मेरा दिल धड़कता है।”

उनकी कहानी एक मिसाल बनी। छात्रा और डॉक्टर का प्यार, जो चुनौतियों से गुजरा लेकिन जीता।

पूजा की जिंदगी में सौरभ का आना एक सपने जैसा था। वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस में घूमती, लेकिन मन सौरभ के पास होता। एक दिन, क्लास के बाद पूजा लाइब्रेरी में थी। सौरभ का मैसेज आया, “क्या कर रही हो?” पूजा ने रिप्लाई किया, “पढ़ रही हूं, हृदय की संरचना पर।” सौरभ ने हंसकर कहा, “मेरा हृदय तो तुम्हारे पास है।”

वे मिलते, कॉफी शॉप में। पूजा सौरभ से मेडिकल की बातें सीखती। “क्या हार्ट अटैक हमेशा घातक होता है?” सौरभ व्याख्या करते, “नहीं, अगर समय पर इलाज हो।” पूजा को लगता कि सौरभ न सिर्फ डॉक्टर, बल्कि शिक्षक भी हैं।

एक वीकेंड, वे आगरा गए। ताजमहल देखा। सौरभ ने कहा, “यह प्यार की निशानी है। हमारा प्यार भी अमर होगा।” पूजा शर्मा गई। रात को होटल में, वे बातें करते रहे। पूजा ने अपनी बचपन की कहानियां सुनाई, सौरभ ने अपनी।

लेकिन जीवन हमेशा आसान नहीं होता। सौरभ का एक मरीज था, जो ठीक नहीं हुआ। सौरभ उदास थे। पूजा ने उन्हें संभाला। “आपने कोशिश की, बाकी भगवान पर।” सौरभ ने कहा, “तुम्हारी वजह से मैं मजबूत हूं।”

पूजा के एग्जाम आए। वह रात-रात भर पढ़ती। सौरभ दवाइयां भेजते, “आराम करो।” एग्जाम के बाद, पूजा टॉप की। सौरभ गर्व से फूले नहीं समाए।

फिर शादी का समय आया। पूजा की सहेलियां जलतीं, “तुम्हें डॉक्टर मिल गया!” पूजा हंसती। शादी में, पूजा सफेद साड़ी में खूबसूरत लग रही थी। सौरभ सूट में। फेरे लिए, वादे किए।

शादी के बाद, वे हनीमून पर शिमला गए। बर्फबारी में, वे खेलते। पूजा ने कहा, “यह जीवन का सबसे अच्छा पल है।” सौरभ ने चूमा, “हर पल अच्छा होगा।”

पूजा एमएससी में एडमिशन लेती। सौरभ क्लीनिक खोलते। साथ में घर बनाते। एक बच्चा होता, नाम आरव। पूजा मां बनती, लेकिन करियर नहीं छोड़ती। Romantic love story में सौरभ पिता बनते, लेकिन डॉक्टर बने रहते।

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